चुनाव अमेरिका में, गाज भारतीयों पर

नई दिल्ली। अमेरिकी प्रशासन ने एच1बी वीजा को लेकर नई पाबंदियां लगा दी हैं। स्थानीय कामगारों की सुरक्षा के नाम पर इस पैसले को राष्ट्रपति चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। जो भी हो, ट्रंप प्रशासन के इस कदम से हजारों भारतीय आइटी पेशेवर प्रभावित होंगे। कहा गया है कि प्रतिबंधों का मकसद योग्य लोगों को एच1बी वीजा देना है। नया नियम 60 दिनों में लागू हो जाएगा।

वीजा पर नए अंतरिम नियम से ‘विशेष व्यवसाय’ की परिभाषा का दायरा छोटा हो जाएगा। कंपनियां विशेष व्यवसाय की परिभाषा के आधार पर ही बाहरियों के लिए एच1बी वीजा का आवेदन करती हैं।

गौरतलब है कि प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत और चीन जैसे देशों से हर वर्ष दसियों हजार कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए इस वीजा पर निर्भर रहती हैं। वैसे सच तो यह है कि नए वीजा प्रावधानों से पहले से ही बड़ी संख्या में भारतीयों ने अमेरिका में नौकरी खो दी है और कोरोना के कारण घर लौट रहे हैं। बता दें कि एच-1बी वीजा एक गैर-प्रवासी वीजा होता है। यह किसी कर्मचारी को अमेरिका में छह वर्ष तक काम करने के लिए जारी होता है। इसे पाने वाले कर्मचारी की सैलरी कम से कम 60 हजार डॉलर यानी करीब 40 लाख रुपए सालाना होना जरूरी है। इस वीजा के जरिये अन्य देशों के लोगों के लिए अमेरिका में बसने का रास्ता भी खुल जाता है। मांग बहुत अधिक होने से इसे हर वर्ष लॉटरी से जारी किया जाता है।

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