चंद्रमा पर फिर उतरा चीन का यान, धरती पर लाएगा चट्टान

नई दिल्ली। चीन एक बार फिर चांद पर अपना झंडा लहरा दिया है। मंगलवार को उसने अंतरिक्षयान चांग ई-5 को सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह पर उतार दिया है। यह चंद्रमा की सतह पर पूर्व निर्धारित जगह के बिलकुल पास उतरा है। चांग ई-5ने सॉफ्ट लैंडिग की है। अब यह चांद की सतह से मिट्टी और पत्थरों के नमूनों को जमा करेगा और जांच के लिए धरती पर भेजेगा। खुदाई के लिए चांग ई-5 के लैंडर में कैमरा, ड्रिल मशीन, स्पेक्ट्रोमीटर जैसे उपकरण लगे हुए गए हैं। गौरतलब है कि चांद पर इस अंतरिक्ष यान को ऐसी जगह पर उतारा गया है, जहां ज्वालामुखी वाली पहाड़ी है। इस यान को चीन के सबसे शक्तिशाली रॉकेट लांग मार्च-5 से 24 नवंबर को लांच किया गया था। 2013 के बाद ऐसा तीसरा मौका है जब चीन चांद पर पहुंचा है। इससे पहले जनवरी 2019 में एक चीनी अंतरिक्ष यान चांग ई-4 ने एक छोटे से रोबोटिक रोवर से चांद की सुदूरस्थ सतह पर उतरकर इतिहास रचा था।

चांद पर जो लैंडर भेजा गया है, उसमें दो किलो तक के पत्थर इकट्ठा करने की क्षमता है। इन नमूनों को लैंडर एक ऑर्बिटिंग मिशन तक पहुंचाएगा। वह इसे धरती तक भेजेगा। चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने के बाद चांग-ई-5 ने अपने लैंडर को उसके सतह पर भेजा। यह लैंडर सुरक्षित रूप से पूर्व निर्धारित जगह पर उतर गया, जबकि उसका ऑर्बिटर चंद्रमा का चक्कर लगा रहा है। लैंडर चांद की जमीन में खुदाई कर मिट्टी और चट्टान निकालेगा। फिर से इस नमूने का लेकर असेंडर के पास जाएगा। असेंडर नमूने लेकर चंद्रमा की सतह से उड़ेगा और अंतरिक्ष में चक्‍कर काट रहे अपने मुख्य यान से जुड़ जाएगा।

बता दें कि चांग ई-5 से पहले सोवियत संघ के अंतरिक्ष यान लूना-24 ने भी चांद की सतह से करीब 200 ग्राम मिट्टी धरती पर भेजी थी। चंद्रमा से इकट्ठा किए गए अब तक से सभी नमूने करीब तीन अरब साल पुराने हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अभी जो चांद के नमूनों को इकट्ठा किया जा रहा है, वे 1.2 से 1.3 अरब साल पुराने होंगे। इससे चांद के भूवैज्ञानिक इतिहास के बारे में अधिक जानकारी मिल सकेगी। चीन ने चांग ई-5यान के प्रक्षेपण का तो लाइव कवरेज दिखाया था, लेकिन लैंडिंग का प्रसारण नहीं किया गया। लैंडिंग के वक्त चांद पर जो तस्वीरें ली गई, सिर्फ उन्हें ही टीवी पर दिखाया गया है। चीन की इस सफलता पर अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने भी बधाई दी है। नासा की वरिष्ठ अधिकारी डॉक्टर थॉमस जरबुचेन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांद पर शोध करने वालों को भी पृथ्वी पर भेजे जाने वाले नमूनों का विश्लेषण करने का अवसर मिलेगा।

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