मोदी के एक और मित्र संकट में, इजरायल में नेतन्याहू की सरकार गिरी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक मित्र डोनाल्ड ट्रंप जहां अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव हार गए, वहीं दूसरे मित्र इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू की सरकार गिर गई है। इजरायल में नई सरकार को चुनने के लिए फिर चुनावों की घोषणा भी कर दी गई है। 23 मार्च को नैसेट (इजरायल की संसद) के लिए वोट पड़ेंगे। बता दें कि वहां दो वर्षों में यह चौथा मौका है, जब चुनाव कराए जा रहे हैं।

नेतन्याहू सरकार 23 दिसंबर की तय समय सीमा के भीतर संसद से बजट पास नहीं करा पाई। इसलिए स्पीकर यारिन लेविन ने संसद को भंग कर दिया। लंबी खींचतान के बाद इस साल मई में ही नेतन्याहू ने विपक्षी ब्‍लू एंड व्‍हाइट पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। इस पार्टी के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बेंजामिन गैंट्ज सरकार में रक्षा मंत्री थे। लेकिन बजट के मुद्दे पर दोनों सहमत नहीं हो सके। गैंट्ज ने कुछ बजट प्रस्ताव सामने रखे थे, जिसके लिए नेतन्याहू राजी नहीं हुए। इससे विवाद इतना बढ़ा कि गठबंधन सरकार ही गिर गई। बताया जा रहा है कि गैंट्ज जहां 2020 और 2021 के प्रस्‍तावित बजट को एक साथ मंजूरी देने की मांग कर रहे थे, वहीं नेतन्‍याहू सिर्फ इसी वर्ष के बजट पर अड़ गए थे। अब सरकार गिर जाने के लिए दोनों एक-दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं। नेतन्‍याहू समर्थकों का आरोप है कि दरअसल गैंट्ज खुद देश की सत्‍ता पर काबिज होना चाहते हैं। जबकि गैंट्ज ने नेतन्‍याहू पर वादा तोड़ने का आरोप लगाया है। कहा कि नेतन्‍याहू ने गठबंधन धर्म को नहीं निभाया। इससे चीजें खराब होती चली गईं। ऐसे में उनके पास में कोई दूसरा विकल्‍प नहीं बचा था। गौरतलब है कि मई में सरकार बनने से पहले भी गैंट्ज सत्‍ता के शीर्ष पर काबिज होने की कोशिश कर रहे थे। माना जा रहा है कि अगले वर्ष होने वाले चुनाव के बाद उन्‍हें सफलता मिल सकती है। इसलिए भी कि अगले साल फरवरी में नेतन्‍याहू को भ्रष्‍टाचार के मामलों में पेश होना है। ऐसे में उनके लिए मुश्किलें बढ़ेंगी, जिसका फायदा यकीनन उनके विरोधी उठाएंगे।

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