बढ़ती आबादी, सिकुड़ती सड़कों से महापर्व पर दरभंगा में महाजाम

विमलनाथ झा, दरभंगा। छठ महापर्व पर दरभंगा फिर महाजाम से जूझ रहा है। सड़कों पर दिनभर गाड़ियां रेंगती रहती हैं। सड़कों पर पैदल चलना भी दूभर हो गया है। सरकारी इंतजाम का कुछ खास प्रभाव देखने को नहीं मिल रहा है। हाल यह है कि शिवधारा से कादिराबाद होते हुए स्टेशन पहुंचने में घंटों लग जा रहा है। इसी तरह दरभंगा स्टेशन से लहेरियासराय समय पर पहुंच जाना भगवान को पा लेने जैसा हो गया है। आए दिन शहर के इस कोने से उस कोने तक पहुंचने में जितना समय लगता है, उतने समय में दिल्ली से दरभंगा की फ्लाइट आ जाती है। दरभंगा एयरपोर्ट शुरू हो जाने से जल्द ही शहर के ट्रैफिक पर पड़ने वाले भारी दबाव की तो कोई कल्पना ही नहीं कर रहा है। इसलिए उसके मद्देनजर कोई योजना भी नहीं दिख रही है।

विडंबना देखिए कि शहर की आबादी आठ दशक पूर्व जब लगभग 65 हजार थी, उस समय नगरपालिका और तत्कालीन प्रशासन ने जमीन अधिग्रहीत कर शहर की प्रमुख सड़कों की चौड़ाई 25 से 30 फीट तय की थी। वर्तमान में शहर की आबादी पांच गुना से भी अधिक हो गई है। ऐसे में जिन मुख्य सड़कों की चौड़ाई 30 फीट थी, वह घटते-घटते 10-12 फीट पर आ गई है। इसके लिए यकीनन स्थानीय निवासी से लेकर जिला प्रशासन और निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी जिम्मेवार हैं।

जानकारी के अनुसार, 1934 के भूकंप में शहर की त्रासदी को देखते हुए तत्कालीन स्थानीय प्रशासन और नगरपालिका के अधिकारियों ने महसूस किया था कि सड़क की चौड़ाई कम रहने से ही जान-माल की क्षति अधिक हुई। चूंकि मिथिलांचल क्षेत्र हाई सिस्मिक जोन है, इसलिए शहर के विकास के लिए 1935 में दरंभंगा इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट का गठन किया गया। इस ट्रस्ट को तत्कालीन दरभंगा महाराज ने भी आर्थिक मदद दी थी। इसी ट्रस्ट के माध्यम से दरभंगा टावर के चारों ओर 30-30 फीट, टावर से भगत सिंह चौक-सीएम साइंस कॉलेज (तत्कालीन गोल मार्केट) होते हुए सिनेमा चौक, टावर से दक्षिण किलाघाट-उर्दू होते हुए हजमा चौक (वर्तमान में लोहिया चौक) तक 30 फीट, टावर से उत्तर हसनचक- आयकर चौराहा होते हुए स्टेशन 30 फीट, बेला मोड़ से मिर्जापुर होते हुए लहेरियासराय टावर तक 30 फीट जमीन अधिग्रहीत कर सड़कें बनाई गई थीं। इसी दौरान टावर से दक्षिण में जमीन अधिग्रहीत कर दिल्ली के गोल मार्केट की तर्ज पर मार्केट बनाया गया था। ताकि एक ही परिसर में व्यापारिक प्रतिष्ठानों को संचालित किया जा सके। कालांतर में सीएम कॉलेज खुलने पर इसी परिसर को 99 रुपये प्रतिवर्ष किराये के रूप में 99 वर्षों के लिए लीज पर दे दिया गया। इसमें वर्तमान में सीएम साइंस कॉलेज है।

पीसीसी से सड़कें हुईं अतिक्रमित-

कालांतर में नगरपालिका से नगर निगम बना। 1999 से दरभंगा में पीसीसी सड़कें बनने लगीं। यानी सीमेंट वाली। शहर में सबसे पहली पीसीसी सड़क 1999 में दरभंगा टावर और एमआरएम रोड में बनी। उसी समय से सड़कों की चौड़ाई घटने लगी। अतिक्रमण बढ़ने लगा। एमआरएम रोड में 12 फीट पीसीसी और सड़क के दोनों ओर दो-दो फीट खरंजा किया गया। सड़क की शेष जमीन पर बगलवालों ने कब्जा जमा लिया। इसके बाद शहर की सभी प्रमुख सड़कों से लेकर गलियों तक में ऐसा ही होने लगा। इस तरह अधिक्रमणकारियों का साम्राज्य तेजी से शहर में बढ़ता गया।

करीब पांच वर्ष पूर्व लाइलाज जाम से निजात के लिए प्रमुख स्थानों पर रोड डिवाइडर और वन-वे ट्रैफिक नियम लागू कर करीब तीन दर्जन स्थानों को नो पार्किंग जोन घोषित कर दिया गया। कुछ दिनों तक डीटीओ और एमवीआई ने वैसी जगहों पर पार्किंग करने वाले वाहनों से पांच सौ रुपये का जुर्माना भी वसूला। इसी दौरान इसमें शहर के सभी थानाध्यक्षों को भी जिम्मेवारी दी गई। एसएसपी की पहल से एक वाहन उठाने वाली गाड़ी भी मंगाई गई। तीन-चार दिन गाड़ी टाउन थाने से टावर चौक तक आई भी, लेकिन फिर वह थाने पर ही खड़ी कर दी गई। इस तरह करीब चार वर्षों से वह पुलिस लाइन की शोभा बढ़ा रही है।

लाइलाज सड़क जाम से परेशानी तब और बढ़ जाती है, जब जलनिकासी की ठोस योजना के अभाव में जगह-जगह जलजमाव हो जाता है। इससे बचाव की कोशिश बारिश में ही की जाती है, जिससे सारे उपाय उसी समय पानी में बह जाते हैं। तब कई मोहल्लों में पानी सड़क से घरों में पहुंच जाता है और वहां से आंखों में। बहरहाल, इस जाम और जलजमाव की मिलीभगत से दरभंगा टावर, बाकरगंज, कमर्शियल चौक जैसे प्रमुख स्थानों के व्यवसायियों का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। हाल के वर्षों में आयकर चौक, राजकुमारगंज, मौलागंज, अललपट्टी, शिवधारा आदि जगहों पर कई ब्रांडेड शोरूम, मॉल, बिग बाजार शुरू होने से दरभंगा टावर स्थित दुकानों में सन्नाटा रहता है। लेकिन जाम सबसे अधिक दरभंगा टावर और इससे निकलने वाली सड़कों पर ही लगता है। शहर की इस कुव्यवस्था में सुधार के मकसद से नगर निगम में आईएएस नगर आयुक्त पदस्थापित किया। फिर भी स्थिति यह है कि, मर्ज बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की।

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