ठकुआ भी हुआ लोकल से ग्लोबल, ऑनलाइन भी आनंद

सोनू झा, दरभंगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकल से ग्लोबल बनने का मंत्र देश में तेजी से गहरी जड़ें जमा रहा है। बिहार और इसकी सीमा से सटे इलाकों का सबसे बड़ा पर्व छठ पहले ही ग्लोबल हो चुका है। अब उसके प्रसादों की बारी है। खासकर ठकुआ की, जिसकी दिवानी आज दुनिया हो गई है। ठकुआ के साथ विडंबना यह है कि यह केवल छठ के समय ही मिलता है। हालांकि मिथिलांचल में कई और अवसरों पर भी ठकुआ बनाने का चलन रहा है, लेकिन जो स्वाद छठ के समय बने ठकुआ में आता है, वह दूसरे अवसरों पर नहीं। छठ के बाद लगभग हर दफ्तर में लोगों को इंतजार रहता है कि उनके बिहारी दोस्त आएं और ठकुआ खाने को मिले। इस बार कोरोना के चलते अधिकतर जगहों पर वर्क फ्रॉम होम है। ऐसे में हो सकता है कि कई लोगों को अपने बिहारी साथियों से ठकुआ नसीब ना हो। तो बता दें कि ठकुआ के लिए किसी बिहारी दोस्त का इंतजार कतई ना करें। बस, इसका नाम लेकर ऑनलाइन हो जाएं। इसलिए कि अब ठकुआ भी ऑनलाइन उपलब्ध हो गया है। बिहार के मधुबनी जिले की अंधराठाढ़ी निवासी पुष्पा झा ने इसकी शुरुआत पुणे से की है, जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं।

पुष्पा झा

पुष्पा पिछले काफी समय से मिथिला के प्रसिद्ध पकवानों को लोगों के बीच ऑनलाइन लेकर आना चाहती थीं। लेकिन, उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिल रही थी। अचानक उनके मन में ठकुआ का खयाल आया। ठकुआ का विकल्प देते ही लोगों से इतने बड़े पैमाने पर ऑर्डर आने लगे कि अब वह मांग पूरी नहीं कर पा रही हैं। पुष्पा ने बताया कि महानगरों तो दूर, छोटे-छोटे शहरों से भी इसकी काफी मांग हो रही है। इनमें अधिकतर वे हैं जिनके बच्चे विदेश में रहते हैं और वह उनके लिए ठकुआ वहां ले जाना चाहते हैं। ठकुआ की सफलता से उत्साहित पुष्पा अब सत्तू और मखान से तैयार होने वाले मिथिला के व्यंजन को भी जल्द ही लोगों के बीच लेकर आएंगी। लोग ये सभी व्यंजन www.cwtfoodkraft.co.in से ऑर्डर कर सकते हैं।

ठकुआ से लोग किस कदर परिचित हैं, इसका उदाहरण देते हुए पुष्पा ने बताया कि कुछ दिनों पहले जब उन्होंने अपने काम में मदद के लिए लोगों को जोड़ना चाहा तो उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया। फेसबुक और वॉट्सएप ग्रुप पर उन्होंने लोगों से अपने साथ जुड़ने के लिए अपील की। लेकिन, उन्हें कोई खास जवाब नहीं मिला। लेकिन ठकुआ का जिक्र करते ही उन्हें अपनी सोसाइटी से ही कई महिलाएं मिल गईं जो आज उनके साथ इस काम में जुटी हुई हैं। ये वैसी महिलाएं हैं, जिनके पति अच्छे-अच्छे पदों पर नौकरी कर रहे हैं। इन महिलाओं में केवल एक मिथिला की हैं, बाकी कोई महाराष्ट्र से तो कोई गुजरात से हैं। लेकिन, ठकुआ से सभी परिचित हैं।

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