110वीं जयंती पर याद किए गए आचार्य सुमन

दरभंगा। मिथिला-मैथिली के इतिहास पुरुष आचार्य सुरेंद्र झा सुमन की 110वीं जयंती विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में शनिवार को मनाई गई। इस दौरान हराही पोखर स्थित सुमन जी की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। इस मौके पर विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने आचार्य सुमन को ऐतिहासिक महापुरुष बताते हुए एक आम मैथिल, एक साहित्यकार, एक संपादक, एक विधायक और एक सांसद के रूप में उनके कृतित्व एवं व्यक्तित्व की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सही मायने में सुमन जी एक अमर साहित्यकार एवं कुशल राजनीतिज्ञ थे।

इस मौके पर विधायक संजय सरावगी ने कहा कि मिथिला व मैथिली साहित्य के विकास के लिए आजीवन समर्पित रहे सुरेंद्र झा सुमन का मिथिला के सामाजिक एवं राजनीतिक विकास में न सिर्फ अभूतपूर्व योगदान रहा, बल्कि उनके द्वारा कायम आदर्श के प्रतिमान आज भी काफी महत्व रखते हैं। उन्होंने सुमन जी को अपना आदर्श पुरुष बताते हुए कहा कि उन्हें राजनीति में लाने का श्रेय सुमन जी को ही जाता है। मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा ने कहा कि वह मूल रूप से महाकवि थे, जिनकी रचनाओं में सदैव प्यार व दुलार प्रस्फुटित होता रहा। संस्थान के सचिव प्रो जीवकांत मिश्र ने आचार्य सुमन को सजग राष्ट्र का सजग प्रहरी बताया। मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने आचार्य सुमन रचित शिव पंचाक्षर की चर्चा करते हुए कहा कि देवों के देव महादेव की महिमा का वर्णन करती उनकी यह रचना भारतीय साहित्य की अनुपम कृति है। मौके पर विजयकांत झा, प्रो चंद्रशेखर झा बूढाभाई, विनोद कुमार झा, आशीष चौधरी, फूल कुमार् राय, मीणा झा, डॉ गणेश कांत झा, डॉ उदय कांत मिश्र, शंभूनाथ झा, गिरधारी झा, चंद्र मोहन झा पड़वा आदि उपस्थित थे।

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