नाती के लिए रो रहा है कुशेश्वरस्थान का रौता गांव

विमलनाथ झा, दरभंगा। दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान प्रखंड में जिस रौता गांव ने रामविलास पासवान के बालपन की लीलाओं को देखा था, वहां अब मातमी सन्नाटा पसरा है। उनके निधन की खबर सुनते ही सब सन्नाटे में आ गए हैं। ननिहाल से नाती के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए शनिवार को कुछ लोग पटना जा सकते हैं। कोरोना के कारण संख्या गिनती की ही रहेगी।

रामविलास पासवान को प्यार से रामू कहने वाले उनके नाना बांके पासवान और मामा पूर्व विधायक जगदीश पासवान बहुत पहले स्वर्ग सिधार चुके हैं। लेकिन इस क्षेत्र में रामविलास द्वारा किए गए अनगिनत कार्यों की चर्चा कर यहां के लोग नहीं थकते। इसी क्षेत्र के समाजसेवी उपेंद्र यादव बताते हैं कि रामविलास ने कुशेश्वरस्थान जैसे पिछड़े क्षेत्र में ना केवल ननिहाल बल्कि आसपास के इलाकों का भी व्यापक विकास किया। ,नाना बांके पासवान के निधन के बाद ममेरे भाई जगदीश पासवान कुशेश्वरस्थान से विधायक बने। मामा लक्ष्मी पासवान वर्षों तक मुखिया रहे और उनके बाद पुत्र रामश्रृंगार पासवान भी मुखिया बने। कुशेश्वरस्थान के जुगैना निवासी चंद्रवली यादव कहते हैं कि रामविलास जैसा नाती पाकर यह क्षेत्र धन्य हो गया। चूंकि बचपन की शिक्षा पासवान की ननिहाल में ही हुई थी, इसलिए रौता और आसपास के लोग उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी जानते थे। इस क्षेत्र के लोग जब भी किसी काम से दिल्ली जाते थे तो रहने का ठिकाना रामविलास जी का घर ही होता था। ऐसे लाड़ला नाती के चिरविश्राम में जाने से कुशेश्वरस्थान का शोक में डूबना लाजिमी ही है।

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