लोक और शास्त्र एक-दूसरे के पूरक : शशिनाथ

मिथिला लोकमंथन के सदस्यों ने किया कुलपति व कुलसचिव का स्वागत

दरभंगा : मिथिला लोकमंथन के सदस्यों ने शनिवार को कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के परिसर स्थित स्थानीय कार्यालय में शनिवार को संस्कृत विवि के कुलपति डॉ. शशिनाथ झा व कुलसचिव डॉ. शिवरंजन चतुर्वेदी को मिथिला की परंपरा के अनुसार पाग-चादर से स्वागत किया। कुलपति ने मिथिला की संस्कृति को उजागर करने वाले आयोजन की तैयारियों पर प्रसन्नता जाहिर की। कहा कि लोक और शास्त्र में अन्योनाश्रय संबंध है। दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। कुलपति ने मिथिला लोक मंथन के माध्यम से यहां की संस्कृति की विशेषताओं को मुखरित करने के प्रयास की सराहना की। उन्होंने अपने समक्ष प्रस्तुत संस्कृत नृत्य नाटिका को भी सराहा। उन्होंने कहा कि आयोजन में हर संभव सहयोग के लिए वे प्रस्तुत रहेंगे। कुलसचिव ने मिथिला की संस्कृति, परंपरा और लोक व्यवहार की प्रशंसा करते हुए अपने सहयोग का भरोसा दिलाया। संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ. श्रीपति त्रिपाठी ने पूर्व से की जा रही तैयारियों का ब्यौरा रखते हुए मिथिला की विद्वत परंपरा पर केंद्रित ग्रंथ प्रकाशन की योजना से सभी को अवगत कराया। डॉ. शंकर कुमार लाल के संचालन में हुए कार्यक्रम का आरंभ अखिलेश व प्रमोद के वेद मंत्रोच्चार के साथ हुआ। चेतना के उत्तर बिहार बिहार संयोजक विजय शाही ने मिथिला लोकमंथन की पृष्ठभूमि से सभी को अवगत कराया। मिथिला लोकमंथन के संयोजक डॉ. कन्हैया चौधरी ने कोरोना संकट के बावजूद गतिविधियों को ऊर्जावान रखने के लिए सभी सहयोगियों के प्रति आभार जताया। साथ ही उन्होंने कहा कि जैसे ही स्थिति सामान्य होगी वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। तत्काल छोटे-छोटे आयोजन चलते रहेंगे।

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सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हुआ आयोजन :

कार्यक्रम के पहले पहले चरण में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का  हुआ। इससे वातावरण मनोरम हो उठा। निरुपमा,  ऋचा, कोमल,  रूपा,  अमन,  सौरभ,  रोहित,  अभिषेक,  हर्ष और आदित्य ने कमलेंद्र चक्रपाणि के निर्देशन में वेदांतेषु नृत्य नाटिका प्रस्तुत की जिसने सभी को अभिभूत कर दिया। वहीं जनसंख्या विस्फोट पर प्रस्तुत नाटक ‘ये कहां आ गए हम’  के कलाकारों अमन,  अभिषेक,  हर्ष,  सौरभ,  रूपा,  कोमल,  सुमन और आदित्य ने नाटक के संदेश को सफलतापूर्वक संप्रेषित किया। विवेक जायसवाल के निर्देशन में संपन्न नाटक की प्रस्तुति में मोहित,  सागर और सुमन ने संगीत से सहयोग दिया। कार्यक्रम का समापन मनीष,  गोपाल रूपाली,  ब्रजेश्वर पाठक,  अर्चना और उज्जवला के मिथिला वर्णन गीत के साथ किया गया।

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