खराब मौसम से दरभंगा-मुंबई फ्लाइट रद्द, मची अफरा-तफरी

आर्यांश, दरभंगा। आधे-अधूरे मन से शुरू किए गए दरभंगा एयरपोर्ट की हकीकत गुरुवार को सामने आ गई। आठ नवंबर से शुरू हुए इस एयरपोर्ट पर सुविधाओं के अभाव में गुरुवार यानी तीन दिसंबर को मुंबई से आने और जाने वाली फ्लाइट रद्द हो गई। फ्लाइट रद्द होने से परेशान यात्रियों की मदद करने के लिए दरभंगा में कोई व्यवस्था तक नहीं की गई। इससे उन्हें छह घंटे तक बिना कुछ खाए-पीए रहना पड़ा। उधर सुबह में 11 बजे जो फ्लाइट मुंबई से आ रही थी, उसे खराब मौसम के कारण पटना डायवर्ट कर दिया गया। वहां घंटों इंतजार के बाद बताया गया कि फ्लाइट रद्द कर दी गई है और अब दरभंगा तक सड़क मार्ग से जाना होगा। सोशल मीडिया पर जब बवाल मचा तो स्पाइस जेट ने फायदा उठाते हुए आगे का भी इंतजाम कर लिया। उसने ट्वीट करके बता दिया कि सर्दियों में मौसम खराब होने से फ्लाइटें लेट होने के अलावा इसी तरह रद्द भी हो सकती हैं। गौरतलब है कि स्पाइस जेट ने गत 14 नवंबर को ही मौसम को ध्यान में रखते हुए दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के लिए विंटर शेड्यूल जारी किया था।

दरभंगा एयरपोर्ट से दिल तोड़ने वाली खबर ऐसे समय में आई है जब स्पाइस जेट कंपनी यहां से जल्द ही दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरू होते हुए अहमदाबाद, अमृतसर, देहरादून, गुवाहाटी, जयपुर, मैंगलोर, मदुरई, चेन्नई, पुणे, सूरत और उदयपुर तक के लिए अपनी सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा हवाई मार्ग से दुबई को भी दरभंगा से जोड़ने की कवायद चल रही थी। ऐसे में गुरुवार को खराब मौसम के कारण फ्लाइट रद्द होने से जुड़े जो तथ्य सामने आए, वह हैरान करने वाले हैं। गौरतलब है कि दरभंगाटाइम्स.कॉम ने एयरपोर्ट चालू होने से काफी पहले बता दिया था कि उड़ानों के लिए जो तकनीकी मदद चाहिए, उनमें से कई दरभंगा में उपलब्ध नहीं हैं। विमान को दिशा दिखाने वाला डीवीओआर नामक सिस्टम तक एयरपोर्ट का अपना नहीं है। इसके लिए भारतीय वायु सेना के रडार से काम चलाया जा रहा है। अब स्पाइस जेट ने बताया है कि दरभंगा एयरपोर्ट पर आईएलएस (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) नहीं होने से गुरुवार को सुबह में मुंबई वाली फ्लाइट (एसजी 944) को लैंड नहीं कराया जा सका। बता दें कि इस सिस्टम की मदद से ही पायलट कोहरे में भी विमान को उतार पाता है। चूंकि सुबह धूप पूरी तरह खिली नहीं थी, इसलिए मुंबई की प्लाइट को पायलट लैंड नहीं करा सका और उसे मजबूरी में दरभंगा के बजाय पटना जाना पड़ गया। शेड्यूल के मुताबिक, लैंडिग के 45 मिनट बाद ही इसी विमान (एसजी 945) को वापस मुंबई जाना था, जो संभव नहीं हो सका। हालांकि दिन में धूप निकल आने के कारण दिल्ली और बेंगलुरु के विमान समय से ही आए और गए।

एयरपोर्ट के अंदर और बाहर बहुत सारी बुनियादी सुविधाएं नहीं होने से यात्रियों का कष्ट और बढ़ गया। एयरपोर्ट पर एक समय में अधिकतम सौ यात्रियों को ही संभालने की व्यवस्था है। मुंबई जाने वाले वहां पहले से थे। फिर दिन में पहले दिल्ली और बाद में बेंगलुरु के लिए भी विमान यात्रियों के पहुंच जाने से एयरपोर्ट पर व्यवस्था चरमरा गई। एयरपोर्ट के बाहर कोई पार्किंग सुविधा नहीं होने से यात्रियों के परिजन और परेशान हुए। ऐसे में अब सवाल यह उठाया जाने लगा है कि क्या दरभंगा में यह सीजनल एयरपोर्ट बनकर रह जाएगा? पर्व-त्योहार पर विमानन कंपनी बेतहाशा किराये से मालामाल होंगी और बाकी दिनों में यात्रियों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता रहेगा?

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