गौशाला की जमीन का सीमांकन नहीं होने से अतिक्रमण चरम पर

दरभंगा :  वर्ष 1881 में स्थापित दरभंगा गौशाला अपने स्थापना काल के समय देश के सबसे बड़ी गौशालाओं में दूसरी गौशाला थी। लेकिन, अब गौशाला की हालत देखकर लोग काफी ही चिंतित है। गौशाला की इस दयनीय स्थिति की जिम्मेदार प्रशासन के साथ गौशाला प्रबंधन व संचालन कमेटी बराबर का जिम्मेदार है। लेकिन, समाजसेवियों की और से समय-समय पर गौशाला की पुनरुद्धार के लिए पहल की जाती रही है। इसी क्रम पहल करते हुए जदयू के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. राममोहन झा ने प्रमंडलीय आयुक्त मयंक बरबड़े को ज्ञापन सौंपकर मिर्जापुर स्थित गौशाला की दयनीय स्थिति की ओर ध्यानाकृष्ट कराया है। ज्ञापन के माध्यम से बताया कि वर्ष 1880 में तत्कालीन दरभंगा महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह की ओर से शहर के मध्य विशाल भूखंड पर बने संसाधन संपन्न गौशाला के मिर्जापुर व गंगवारा स्थित भूखंड का अविलंब सीमांकन अपने संरक्षण में कराते हुए अतिक्रमण मुक्त कर सुदृढ़ व सम्यक संचालन की अनिवार्यता की सख्त जरूरत है। सीमांकन नहीं होने के कारण गौशाला की जमीन पर अतिक्रमण चरम पर है। वर्तमान कमेटी निर्धारित कार्यावधि पूर्ण होने की स्थिति में गौशाला में नए आजीवन सदस्य व नए गौ प्रेमी मतदाता को जोड़ते हुए पूर्व की भांति चुनाव कराते हुए नई कमिटी का गठन किया जाए। साथ ही स्वतंत्र पशुओं का पुनर्वास गौशाला के मिर्जापुर व गंगवारा स्थित परिसर में किया जाए।
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व्यवसायिक दुकानों का किराया पुननिर्धारण करने की जरूरत :

डॉ. राममोहन ने आगे लिखा है कि गौशाला को वित्तीय सुदृढ़ता के लिए गौशाला के अंतर्गत आने वाले व्यवसायिक दुकानों (लगभग 55)  का बाजार मूल्य से किराया पुननिर्धारण करवाने के लिए जल्द से पहल करने की जरूरत है। आगे उन्होंनें आयुक्त से अपील की है कि सरकार के पास गौशाला के विशाल भूखंड पर केंद्रीय गौवंश अनुसंधान संस्थान की इकाई व गाय के गोबर व मूत्र के शोध केंद्र का प्रस्ताव भेजा जाए।
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दरभंगा गौशाला देश की सबसे पुरानी गौशालाओं में से एक :

मालूम हो कि दरभंगा गौशाला का अतीत बड़ा ही गौरवशाली रहा है। मिर्ज़ापुर में  पांच एकड़ में फैला गौशाला बिहार की ही नहीं अपितु देश की सबसे पुरानी गौशालाओं में से एक है। इसके संस्थापक मिथिलेश महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह थे, जिनकी मूर्ति इसके गौशाला परिसर में स्थापित है। शहर के मध्य मिर्ज़ापुर और गंगवारा में गौशाला की 46 एकड़ जमीन है। वर्ष 1881 में महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह की ओर से लगभग पांच एकड़ में स्थापित यह भारतवर्ष की दूसरी सबसे बड़ी गौशाला थी। वर्ष 1888 में गोरक्षा आंदोलन में दरभंगा के महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह सक्रिय रूप से रुचि रखने लगे। उस समय दरभंगा गौरक्षिणी सभा शुरू हुई थी। नागपुर गौरक्षिणी सभा ने उन्हें वर्ष 1893 में मध्य प्रांत,  उत्तर-पश्चिमी प्रांत और अवध और बिहार के सभी सभाओं का अध्यक्ष बनने के लिए आमंत्रित किया। महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह ने रुपये दान करने का संकल्प लिया। वे गाय मेमोरियल मूवमेंट के संरक्षक थे और एक लाख रुपये का योगदान दिए थे। दरभंगा में प्रथम बिहार प्रांतीय गोरक्षा सम्मलेन पंडित मदन मोहन मालवीय के सभापतित्व में हुआ था।
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बरसात में पानी में खड़ा होकर चारा खाने को मजबर गायें :

गौशाला की तकरीबन 54  दुकानों से 45  हजार मासिक किराया आता है।  लेकिन, यह किराया 35  वर्ष पूर्व किए गए लीज के आधार पर आ रहा है। यह वर्तमान दर के अनुसार काफी कम है। गायें बरसात की दिनों में पानी मे खड़ा होकर चारा खाने को मजबूर हैं। परिसर के सारे भवन जर्जर और जीर्ण हो चुके हैं। बचे हुए गायों के देहावसान की स्थिति में उसी परिसर में कम गड्ढे कर उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाता है, जिससे आसपास के मोहल्लावासियों को संक्रमण फैलने का डर सताता रहता है। जबकि अभी कोरोना काल चल रहा है।
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सीमांकन न होने की वजह से अतिक्रमण व्याव्त :

गौशाला आर्थिक व संसाधनों के नाम पर कंगाल हो चुका है। पर, बाहरी लोग गोशाला के आंतरिक संसाधन और जमीन से मालामाल हो रहे हैं। सीमांकन न होने की वजह से अतिक्रमण भी व्याप्त है। वर्ष 1953 में बिहार राज्य गौशाला अधिनियम के तहत राज्य की अन्य गोशालाओं की तरह दरभंगा गौशाला का भी अधिग्रहण हुआ है। गौशाला के पास पर्याप्त संसाधन है। बावजूद इसका संचालन ढंग से नहीं हो पा रहा है।
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गोशाला परिसर झंडोत्तोलन करने तक भी नहीं आते हैं सचिव व अध्यक्ष :

पदेन अध्यक्ष अनुमंडलाधिकारी व पूरी वर्तमान कमेटी का कार्य-कलाप भी गौशाला के विकास के प्रति नकारात्मक ही दिखता है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गौशाला के सचिव या अध्यक्ष भी यहां झंडोत्तोलन तक करने परिसर में नहीं आते हैं। पूर्व से चल रहे गोबर गैस प्लांट व गोपाष्टमी जैसे पर्व कही खो सा गया है। विदित हो कि पटना उच्च न्यायालय के वाद संख्या CWJC No.8428/2009 में राज्य भर के 86  गौशालाओं के परिसंपत्तियों के संरक्षण व मेंटेनेंस का निर्देश भी राज्य सरकार को प्राप्त हैं। उक्त पत्र की एक प्रति जिलाधिकारी को भी प्रेषित की गई है।

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