दरभंगा एयरपोर्ट के महीना पूरा होते ही खुल गई मोदी सरकार की कंजूसी

आर्यांश, दरभंगा। विद्यापति के नाम पर दरभंगा एयरपोर्ट को शुरू हुए एक महीना पूरा हो रहा है। विधानसभा चुनाव के दौरान दरभंगा में सात नवंबर को मतदान होने के अगले दिन यह शुरू हुआ था। तब कहा गया था कि शुरू करने में जल्दबाजी मचाई जा रही है। लेकिन चुनावी शोर में इस हकीकत की अनदेखी कर दी गई। लिहाजा चुनावी मौसम खत्म होते ही असली मौसम की मार से आठ करोड़ मिथिलावासियों के वर्षों पुराने सपने को साकार करने वाला दरभंगा एयरपोर्ट पस्त हो गया है। दिसंबर के पहले हफ्ते में ही मामूली कोहरे में इसका दम फूल गया है। देश के किसी भी अन्य शहर से दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु का जो किराया होता है उससे दो से तीन गुना तक अधिक देने के बाद भी मंजिल तक पहुंचाना पायलट के हाथ में नहीं रह गया है। कहना ही होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने यहां विकसित एयरपोर्ट का आधार जुटाने में कंजूसी की है। इससे विमान यात्री ही नहीं, वे भी परेशान हैं जो इसे शुरू कराने का श्रेय ले रहे थे।

मौसम के कारण सप्ताह भर से विमान सेवा बाधित होने से पूरे मिथिला में त्राहिमाम मचा हुआ है। यह सब हो रहा है सिर्फ इसलिए कि किसी भी एयरपोर्ट के लिए आवश्यक आईएलएस (इंस्ट्रूमेंट लैंडिग सिस्टम) और डीवीओआर यहां नहीं है। आईएलएस में रेडियो सिग्नल के जरिये लाइट को ऐसे व्यवस्थित किया जाता है, कि पायलट को कम विजिबिलिटी, खराब मौसम, बर्फबारी या अन्य स्थितियों में भी विमान उतारने में आसानी हो। डीवीओआर से पायलट को आसमान में दिशा का ज्ञान होता है। डीवीओआर के लिए जारी टेंडर ही रद्द हो गया था। सिर्फ आठ नवंबर से शुरू करने की जिद में यह वायु सेना से उधार लिया गया। सबसे शर्मनाक तो यह है कि रनवे पर ग्राउंड लाइटिंग सिस्टम की व्यवस्था अभी तक नहीं है। लिहाजा सुबह और शाम मामूली कोहरे से भी रनवे पर दिखना मुश्किल हो जा रहा है। हालांकि एयरपोर्ट के सूत्र बताते हैं कि रनवे पर लाइटिंग का काम शुरू कर दिया गया है। लेकिन इसे पूरा होने में समय लगेगा। रनवे की लंबाई के कारण नहीं, बल्कि स्टाफ की कमी से। बताया जाता है कि एयरपोर्ट पर इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट में सिर्फ एक इंजीनियर है। दूसरे, यह हो जाने पर भी रात में या कम रोशनी में विमान को उतारना मुश्किल ही रहेगा। वजह वही-आईएलएस का नहीं होना। चूंकि एयरपोर्ट केंद्र सरकार के जिम्मे है, इसलिए राज्य सरकार इसमें कुछ नहीं कर सकती।

वैसे राज्य सरकार जो कर सकती थी, वह भी नहीं कर रही है। जैसे 11 एकड़ में फैले इस एयरपोर्ट की चहारदीवारी अभी तक नहीं बनी है। इससे रनवे पर नीलगाय के आ जाने का खतरा बना ही रहता है। अक्तूबर के आखिरी हफ्ते में 35 लाख में यहां से नीलगायों को हटाने के लिए वन विभाग से बात हो गई थी। फिर भी कुछ नहीं हुआ। चहारदीवारी का काम यूं तो वायु सेना यानी रक्षा मंत्रालय को करना था। लेकिन पैसे के कारण वह इसे राज्य सरकार के सिर मढ़ा जा रहा है। पार्किंग का काम भी सिर्फ समीक्षा बैठक तक सीमित है। पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं होने से गेट से बाहर आते ही एनएच डराने लगता है। फ्लाइटें रद्द या लेट होने से सड़क पर छोटे-बड़े वाहनों की लाइन लग जा रही है। कहने को तो यह एनएच-105 है, लेकिन मात्र 12 फीट की चौड़ाई वाला। यह दरभंगा के दिल्ली मोड़ से केवटी के छतवन तक सिंगल लेन ही है। किसी बड़ी दुर्घटना से बचने के लिए राज्य सरकार को इस एनएच की चौड़ाई बढ़ाने की दिशा में तत्काल पहल करनी चाहिए।

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