दरभंगा एयरपोर्ट से विमान सेवा शुरू

रविवार को बेंगलुरु से दरभंगा पहुंची फ्लाइट का स्वागत वाटर सैल्यूट से किया गया

विमलनाथ झा, दरभंगा। मिथिलांचल की राजधानी के रूप में मशहूर दरभंगा से रविवार को विमान सेवा शुरू हो गई। दरभंगा में लैंड करने वाली पहली फ्लाइट बेंगलुरु की रही। दिन में 11.20 पर इसके लैंड करते ही चारों तरफ खुशी की लहर उठ गई। एयरपोर्ट पर इस विमान को वाटर सैल्यूट दिया गया। इसके साथ दरभंगा से दिल्ली, बेंगलुरू और मुंबई के लिए तीन जोड़ी स्पाइस जेट की फ्लाइट शुरू हो गई। दरभंगा से पहली उड़ान पौने बारह बजे दिल्ली के लिए हुई। अभी दूसरे राज्यों से आने वालों की संख्या अधिक है। अब मिथिलांचल के लोगों को विमान के लिए पटना एयरपोर्ट जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

बेंगलुरु से पहली फ्लाइट से आने वाले परिजनों को लेने पहुंचे लोगों को इस तरह बाहर ही इंतजार करना पड़ा

चिर प्रतीक्षित आकांक्षा पूरी होने की खुशी रविवार को विद्यापति हवाई अड्डे पर जन-जन की आंखों में झलक रही थी। लोग दरभंगा से उड़ने वाले पहले यात्री विमान से यात्रा कर इसे अविस्मरणीय बनाने को आतुर थे। दूसरी ओर जिनके परिजन बेंगलुरु से फर्स्ट फ्लाइट से लैंड करने वाले थे, वे बार-बार घड़ी और आसमान की ओर देख रहे थे। वैसे एयरपोर्ट पर सुबह से ही गहमागहमी शुरू हो गई थी। यूं तो पहली फ्लाइट बेंगलुरु से सवा 11.05 बजे आनी थी, इसलिए यात्रियों के लिए परिजन दस बजे के आसपास पहुंचने शुरू हुए। गंगवारा के डॉ. राघव नारायण झा भी इनमें थे। उनकी बहन बेंगलुरु से आ रही थीं। इसलिए वह सुबह दस बजे ही रिसीव करने पहुंच गए थे। लेकिन जिन्हें दरभंगा से दिल्ली की पहली फ्लाइट पकड़नी थी, वे नौ बजे से ही पहुंचने शुरू हो गए थे। इसलिए कि पहले दिन को देखते हुए एयरपोर्ट अधिकारियों ने उन्हें तीन घंटे पहले ही बुला लिया था। एयरपोर्ट के अंदर कहीं कोई परेशानी नहीं है, लेकिन बाहर अनेक समस्याएं हैं। सबसे बड़ी समस्या पार्किंग को लेकर है। अभी सड़क पर ही गाडियां खड़ी की जा रही हैं। इससे सड़क पर जाम लग रहा है। रविवार को छुट्टी होने के बावजूद जब इतना जाम लग रहा था, तब सामान्य दिनों का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता था।

अंदर का दृश्य

अंदर स्पाइस जेट ने छह काउंटर बना रखे हैं। सब स्टाफ बाहर से आए हुए हैं। इसलिए मिथिला की राजधानी में होते हुए भी मैथिली का कहीं नामोनिशान नहीं। अनाउंसमेंट आदि भी हिंदी और अधिकतर अंग्रेजी में। आने वाले विमान यात्रियों के सामान के लिए एक ही बेल्ट है। ट्रालियां गेट से अंदर घुसते ही मिल जाती हैं। एयरपोर्ट पर आना-जाना अभी एयर फोर्स की कैंटीन वाले रास्ते से है। यानी गेट नंबर-2 से। वहां से टर्मिनल भवन की दूरी लगभग दो सौ मीटर है। यह गेट दिल्ली मोड़ से जयनगर वाले रास्ते पर बढ़ते ही दायीं ओर है। इस तरह दूर-दराज से बस से आने-जाने वाले अपना सामान लेकर पैदल ही एयरपोर्ट पर पहुंच सकते हैं। इसी तरह एयरपोर्ट से निकलते ही बस स्टैंड होने से आसपास के जिलों में आसानी से पहुंचा जा सकता है। वैसे एयरपोर्ट के सामने ही उगना कैब की टैक्सियां भी खड़ी रहती हैं। इसकी सर्विस दिल्ली-मुंबई और बेंगलुरु में चलने वाली ओला और उबर की तरह ही हैं।

मुंबई जाने वालों को देर तक बाहर सडक पर इंतजार करना पड़ा । इस पर नाराजगी जताते यात्री

पहले दिन समस्या उन्हें अधिक हुई जिन्हें मुंबई जाना था। तीन बजे की फ्लाइट थी और उन्हें तीन घंटे पहले पहुंचने को कहा गया था। लेकिन दूर-दराज से 11 बजे ही पहुंच गए ऐसे विमान यात्रियों को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। इससे उन्हें बाहर सड़क पर कड़ी धूप में घंटों खड़ा रहना पड़ा। इस बात पर यात्रियों ने नाराजगी भी खूब जताई। वे इस बात को समझने के लिए कतई तैयार नहीं थे कि आज पहला दिन है।

पहली फ्लाइट से बेंगलुरु से दरभंगा पहुंचीं गीता झा

कोई भी शुरुआत अनगढ़ ही होती है। इस बात को बेंगलुरु से पहली फ्लाइट से आने वाले यात्री अच्छी तरह समझ रहे थे। बेंगुलरु में अपनी बेटी से मिल कर आने वालीं मधुबनी की शिक्षिका गीता झा इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने की खुशी को संभाल नहीं पा रही थीं। अनुभव के बारे में छूटते ही कहा- अद्भुत और अकल्पनीय। उनके साथ ही सीतामढ़ी के अजय भी आए। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु में विद्यापति पर्व समारोह में दरभंगा की फ्लाइट की जानकारी मिली थी। तभी सितंबर में ही दरभंगा के लिए टिकट ले लिया था। इसी फ्लाइट से राजकुमारगंज के सौरभ भी पहुंचे। इस ऐतिहासिक घड़ी का गवाह बन उन्हें गर्व हो रहा था। दूसरी तरफ लहेरियासराय निवासी संजय कुमार श्रीवास्तव सपरिवार बेटे ऋतु को दरभंगा से दिल्ली की पहली फ्लाइट में बैठाने के लिए पहुंचे थे। पूछने पर उन्होंने कहा कि इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है। पिता-पुत्र दोनों गदगद थे। पिता को एयरपोर्ट के आसपास अभी तक बुनियादी सुविधाएं नहीं उपलब्ध होने को लेकर थोड़ी शिकायत जरूर थी। फिर खुद ही उम्मीद बंधाते हुए कहा- वह सब भी हो जाएगा।

दिल्ली की फ्लाइट में चुनाव आयोग के आईकाॅन मणिकांत झा का स्वागत करते पायलट

बता दें कि दिल्ली के लिए पहली फ्लाइट में चुनाव आयोग के दरभंगा जिला आईकॉन मणिकांत झा भी गए। उनके साथ विष्णु कुमार झा, अनिल अग्रवाल, गौरीशंकर मिश्र, नेहा झा, संजीव कुमार झा और मोनू झा भी दिल्ली गए हैं। फोन पर मणिकांत झा ने एयरपोर्ट के अंदर से ही बताया कि इस ऐतिहासिक पल को अपनी आंखों से देखना अविश्वसनीय है। लेकिन एयरपोर्ट पर मैथिली की उपेक्षा से वह आहत थे। उनका कहना था कि आप कोलकाता जाएं या चेन्नई या मुंबई या बेंगलुरु-सब जगह स्थानीय भाषा का सम्मान किया जाता है। यहां ऐसा नहीं देखना अच्छा नहीं लगा। साथ ही उम्मीद जताई कि जल्द ही इस दिशा में भी कदम उठा लिया जाएगा।

दिल्ली के लिए फ्लाइट में बैठते यात्री
दिल्ली वाली फ्लाइट में सहयात्रियों से मिलते दरभंगा के सांसद गोपालजी ठाकुर । उनके साथ भाजपा के निवर्तमान विधायक संजय सरावगी भी गए हैं

दरभंगा एयरपोर्ट पर प्रतिदिन सबसे पहले बेंगलुरु की फ्लाइट 11.05 बजे लैंड करेगी। यही फ्लाइट दिल्ली के लिए 11.45 बजे दरभंगा से टेकऑफ करेगी। वहां 1.40 बजे दोपहर में पहुंचेगी। दिल्ली से 2.20 बजे रवाना होकर यह फ्लाइट दरभंगा एयरपोर्ट पर शाम चार बजे लैंड करेगी। दरभंगा से शाम 4:30 बजे बेंगलुरु के लिए रवना होगी और 6.55 बजे लैंड करेगी। मुंबई से 12.10 बजे रवाना होकर फ्लाइट 2.30 बजे दरभंगा लैंड करेगी। फिर तीन बजे मुंबई के लिए रवाना होगी। मुंबई पहुंचने का समय शाम 6.10 बजे है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *