ड्रग्स में ‘मौत’ धुआं-धुआं: क्या सुशांत की तरह ही जांच की भी होगी अकाल मृत्यु?

सुशांत सिंह राजपूत के मामले में अब तक जो बातें मालूम हैं, और जो शायद ही कभी पता चले

14 जून 2020: सुशांत सिंह राजपूत मुंबई के बांद्रा स्थित अपने फ्लैट में पंखे से लटके मिले।


25 जुलाई 2020: सुशांत के पिता ने पटना में एफआईआर दर्ज कराई। सुशांत की गर्लफ्रेंड रही रिया चकवर्ती पर पैसे ऐंठने और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया।


19 अगस्त 2020: बिहार और मुंबई पुलिस के बीच टकराव और सियासत तेज होने के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई।


03 अक्टूबर 2020: एम्स की फोरेंसिक टीम ने हत्या के दावों को खारिज किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन हालातों में मौत हुई, उससे यह आत्महत्या का मामला लगता है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में फोरेंसिक रिपोर्ट को लेकर सीबीआई का आधिकारिक बयान नहीं आया है। एजेंसी ने अपने आखिरी आधिकारिक बयान में कहा था कि वह पेशेवर तरीके से इस मामले में सभी एंगल से जांच कर रही है। एक अभिनेता की मौत के इस मामले ने 14 जून से 3 अक्टूबर के बीच जितने मोड़ लिए हैं, उस पर बॉलीवुड की किसी शानदार फिल्म की पटकथा तैयार हो सकती है। लेकिन, उन सवालों के जवाब अब भी नहीं मिले हैं जो पहली नजर में आत्महत्या नजर आने वाली इस मौत से खड़े हुए थे। ये सवाल हैं,

  • सुशांत ने आत्महत्या की थी या उनकी हत्या हत्या की गई थी?
  • आत्महत्या की तो इसकी वजह क्या थी?
  • क्या किसी ने आत्महत्या के लिए उन्हें उकसाया था?
  • यदि हत्या हुई तो इसके पीछे कौन लोग थे?

यदि एम्स की फोरेंसिक रिपोर्ट ही सीबीआई जांच की कुंजी है तो माना जाना चाहिए कि सुशांत ने आत्महत्या की थी। वैसे भी जिस तरह इस मामले में मुंबई के कूपर हॉस्पिटल (जहां सुशांत का पोस्टमार्टम हुआ था) की रिपोर्ट और भूमिका पर सवाल उठाए गए थे, उससे सबकी नजरें एम्स की फोरेंसिक रिपोर्ट पर ही टिकी थी। इस रिपोर्ट से मामले को निर्णायक मोड़ मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी।
सुशांत के परिवार के वकील ने यह दावा कर कि ‘एम्स के डॉक्टर ने उन्हें बताया है कि 200 फीसदी हत्या ही हुई थी’, इस रिपोर्ट को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी थी। हालांकि वकील के दावे को एम्स पहले ही खारिज कर चुकी थी।

बड़ा मोड़
इस मामले में बड़ा मोड़ बिहार पुलिस की जांच शुरू होने के बाद आया। पटना से मुंबई गए बिहार पुलिस के अधिकारी आईपीएस विनय तिवारी को क्वारंटाइन कर दिया गया था। मुंबई पुलिस पर जांच में बिहार पुलिस को सहयोग नहीं करने के आरोप लगे। बिहार के तत्कालीन डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने काफी आक्रामक रूख दिखाया। पटना से मुंबई तक सियासी आरोप-प्रत्यारोप भी खूब हुए। फिर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की जिसे केंद्र ने सरकार ने स्वीकार कर लिया।

पिता का दावा
सुशांत के पिता केके सिंह का दावा रहा है कि उनके बेटे की मौत की वजह रिया चकवर्ती है। उनका यह भी कहना रहा है कि उन्होंने बेटे की जिंदगी खतरे में होने के बारे में मुंबई पुलिस को 25 फरवरी को ही बताया था, पर इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने सुशांत के पैसे के गबन का भी आरोप लगाया था। इस आरोप की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रही है।

ड्रग्स में दबा
सीबीआई जांच शुरू होने से पहले सुशांत की मौत के बहाने बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद का मुद्दा उठा। खासकर, कंगना रनौत ने सुशांत को मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए। लेकिन, सीबीआई जांच शुरू होने के बाद खुले ड्रग्स स्कैंडल ने सुशांत की मौत के पूरे मामले को ही पृष्ठभूमि में धकेल दिया। इस मामले में रिया अपने भाई शौविक के साथ फिलहाल जेल में बंद हैं। दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर, सारा अली खान जैसी बड़ी अभिनेत्रियों से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) पूछताछ कर चुकी है। कई और बड़े नाम एजेंसी के रडार पर बताए जाते हैं।

इन सबके बीच सुशांत की मानसिक बीमारी, ड्रग ​एडिक्ट होने, उनके साथ काम कर चुकी दिशा सालियान की मौत का मामला भी सुर्खियों में आया। पर पूरे प्रकरण में अब तक जितने सनसनीखेज दावे हुए हैं, उनमें से किसी को लेकर ठोस साक्ष्य सामने नहीं आए हैं। दावों का हाल आप इस एक घटना से समझ सकते हैं। मुंबई बीजपी के एक नेता ने दावा किया कि ’13 जून की रात रिया और सुशांत साथ थे। रात के करीब 3 बजे के आसपास रिया को सुशांत घर छोड़ने गए थे।’ यह दावा चौंकाने वाला था, क्योंकि रिया शुरुआत से कहती रही हैं कि आठ जून को सुशांत का घर छोड़कर जाने के बाद से दोनों का संपर्क नहीं था। लेकिन बीजेपी नेता के दावे के अगले ही दिन सुशांत के कुक रहे नीरज ने इसका खंडन कर दिया। इसी तरह रिया द्वारा सुशांत के पैसे हड़पने को लेकर भी जितने दावे हुए हैं, उनमें से किसी की अब तक ईडी ने पुष्टि नहीं की है।

ऐसे में यह सवाल आज भी बरकरार है कि सुशांत की मौत यदि आत्महत्या ही थी तो उसकी वजह क्या थी। किसी लॉजिकल नतीजे तक पहुंचने की जिम्मेदारी सीबीआई पर है। लेकिन, देश के हाई-प्रोफाइल मौत के मामलों में सीबीआई जांच का जो रिकॉर्ड रहा है, वह बताता है कि शायद ही देश को कभी इस सवाल का जवाब मिल पाए!

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